सोमवार, 6 अप्रैल 2009

कहीं आप महाविनाष को तो नहीं बुला रहे हैं?

 गर्भपात या भ्रूण हत्या एक मात्र ऐसा महापाप है जिसका शास्त्रों में कोई प्रायष्चित नहीं बताया गया है। हिन्दुस्तान में और हिन्दुओं द्वारा किया जाने वाला वर्तमानका सबसे बड़ा महापाप है यह। इस देष में गो हत्या और भ्रूण हत्या, दोनों ही ऐसे महापाप हैं जो कि व्यापक स्तरपर सरकारके सामने ही हो रहे हैं। जिस राजा के राज्य में ये पाप होते हों वह इस पाप का मुख्यभागी होता है और इससे कदापि बच नहीं सकता। आजकल अखबारों में, दवाई की दूकानों पर तथा जहाँ देखें वहाँ एक गोली का बहुत और सरेआम इस प्रकार प्रचार किया जा रहा है जैसे किसी खाद्य सामग्री अथवा सौंदर्य प्रसाधन सामग्री का प्रचार किया जा रहा हो। यह गोली कुछ और नहीं बल्कि 72 घण्टे तक के गर्भ को गिराने की दवा है। यह दवा समाज के ताने-बाने को तहस-नहस कर सकती है। इस गोली से दो पाप एक साथ पनप रहे हैं- एक पाप भ्रूण हत्या का और दूसरा व्यभिचार का। अविवाहित कन्याओं तथा विधवाओं को अनैतिक सम्बन्धों में गर्भ ठहरने का भय रहता है, वो नहीं रहने से व्यभिचार बहुत अधिक बढ़ जायगा। चरित्र बना कैसे रहे, यह उपाय तो है नहीं बल्कि बिगाड़ने के हजारों उपाय किये जा रहे हैं। टी.वी., फिल्में, प्रिंट मीडीया, इन्टरनेट, ये सब काम-वासना को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। ऊपर से ऐसी दवाइयें कोढ़ में खुजली का काम कर रही है। इस गोली के आने के बाद बहुत से व्यभिचारी निरोध को काम लेना भी छोड़ रहे हैं। एड्स भी इस पाप से अपने षिकार बढ़ायेगा तथा महाविनाष लीला रचायेगा। अर्थात् किसी भी नजरिये से देखा जाय, समाज का पतन और घोर विनाष करेगी यह दवा। अपनी ही अबोध संतान का अपने ही हाथों कत्ल, कहाँ गयी तुम्हारी मानवता? अरे! ऐसा घिनोना कार्य तो क्रूर और जंगली कहे जाने वाले जानवर भी नहीं करते हैं! इसका तो ईष्वर ही न्याय करेगा। देष में मार-काट (गर्भपात) खुल्लेतौर पर हो रही है। सरकार आँख मूँदकर सो रही है। देष की जिम्मेदारी जिसके कन्धोंपर है, क्या वे इतने पापी और अधर्मगामी होने चाहिये? जो इस दवा को बेचने में लगे है, जो इसको खा रहे हैं, जो इसका प्रचार कर रहे हैं और जिनकी इन सबको रोकने की जिम्मेदारी है, उन सब का सत्यानाष अवष्यंभावी है। अगर कोई कहता है कि इस गोली का व्यभिचार के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है तो मैं उनको चुनौति के साथ सलाह देता हूँ कि पूरे भारत में नहीं कर सको तो केवल गुजरात व महाराष्ट्र इन दो राज्यों में ही सही, आने वाले नवरात्रों के समय इस प्रकार की दवाओं के खपत के आँकड़े एकत्रित करके देख लें। चैंकाने वाले कई तथ्य सामने आयेंगे। उनमें इसका प्रयोग करने वाली अधिकतर अविवाहित कन्याएँ, परित्यागताएँ या फिर विधवाएँ होगी। व्यभिचार और क्रूर हत्याओं में संलिप्त ये आप और हम में से ही किसी की बेटी होगी तो किसी की बहन। अतः ऐसी दवापर तुरन्त प्रतिबन्ध लगना चाहिये। नहीं तो फिर प्रकृति की एक भयंकर विनाष लीला में समा जाने के लिये अपने आप को तैयार रखें। इतना अन्याय ज्यादा दिन तक चलेगा नहीं। जय गोमाता, जय गोपाल!
एक गोसेवक